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साधक को चाहिए कि अपनी साधना की निरंतरता से व्यक्तित्व की चमक बनाये रखे बजाय इसके कि वह स्थान, वस्तु या व्यक्ति दूंदते रहें जिसके प्रभाव से हमारी चमक बढ़ जाये | अगर हमारा व्यक्तित्व चमकदार होगा तो गुरु अथवा ईश्वर हमारा उपयोग विशेष कार्य के लिए स्वयं कर लेंगे , क्योंकि सारी योजना उसी परमात्मा की है| योगी अरविन्द ने कहा है - साधक को चाहिए कि अपने को शरीर, मन और बुद्धि के स्तर पर स्वस्थ, पवित्र और शांत रखकर नित्य अपने इष्ट से निवेदन करे - "हे प्रभु मैं आपको समर्पित हूँ आप मेरा उपयोग कर लें " और पुन: परमात्मा की इच्छा पर छोड़ दें वे कब, कंहा, कैसे, क्यों और कितना उपयोग करते हैं | इसके लिए वे साधक को प्रेरणा देते और अनुकूल परिस्थिति का निर्माण भी करते हैं | 😐
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